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बुढ़िया की इज्जत बच गई

बुढ़िया की इज्जत बच गई एक गांव में एक बुढ़िया रहती थी। उसको उसके परिवार में कोई ध्यान नहीं देता था।  एक दिन सोचा कि मैं कहीं दूर चली जाती हूँ। तो…

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ए मेरे दुश्मनो

ए मेरे दुश्मनो चाहे खेल बड़ा ही खेलो। चाहे जितनी चाले चल लो चाहे मुझको तोड़ बिखेर दो जितना वार करना हो तुमको, कर सकते हो। बस इतना ,तुम याद…

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मानव सोच

मानव सोच मनुष्य प्रकृति की उत्कृष्तम रचना है।  इस धरा के प्राणियों मे उसे सर्वाधिक सोचने की क्षमता प्रदान है।  यह सोच दिमाग की वो तरंगे है। जिसे मानो सदियों…

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