सकारात्मक व नकारात्मक में संतुलन बनाना

सकारात्मक व नकारात्मक में संतुलन बनाना
किसी मुद्दे पर विचार करना सकारात्मकता या नकारात्मकता होना चाहिए, जहाँ हम आए दिन अंग्रेजी मे पॉजिटिव माइंड और नेगेटिव माइंड के रूप में बोलते रहते हैं, हर कोई ज्ञान देता है, पॉजिटिव रहो, हम यह कह सकते हैं,किसी भी समय नकारात्मकता नहीं सोचना चाहिए, परंतु यह कहां तक सही है अगर हम हर बात पर पॉजिटिव सोच रखे तो जरूरी नहीं कि वह काम होगा किसी काम को चाहना,करना,और होने में अंतर होता है, क्योंकि हवाई जहाज बनाने के बाद यह मान ले कि कोई समस्या नहीं आएगी परंतु नेगेटिव माइंड यह मानता है की समस्या आ सकती है तभी वह पैराशूट का आविष्कार करेगा तो यहां यह देखा जा सकता है कि नेगेटिव माइंड भी आविष्कार की जननी है हा एक पॉजिटिव माइंड अच्छा होता है पर समस्या आने पर उसके पास कोई ऑप्शंस नहीं होता है वहीं पर नेगेटिव माइंड अपने पास ऑप्शंस भी रखता है तभी स्कूल के समय बैक बेंचर एक समय आने पर दुनिया में कमाल कर जाते हैं जरूरी नहीं होता प्रथम लाइन में बैठे हुए विद्यार्थी ही कुछ अच्छा करें यहाँ पर अधिक पॉजिटिव और अधिक नेगेटिव विनाश का कारण बनता है पॉजिटिव के साथ नेगेटिव भी होना जरूरी होता है जहाँ समस्या आने पर पहले से ही ऑप्शंस तैयार होते हैं इसलिए पॉजिटिव और नेगेटिव में संतुलन बनाना जरूरी होता है
Author : kanchan Thakur